16 दिसंबर 2020 - 17:10
ईरान, रूस व चीन का गठबंधन बाइडन के लिए सब से बड़ी चुनौती, दस बरस में शुरु हो जाएगा अमरीका का बिखराव, ईरान कैसे बना इतना ताकतवर ? रायुलयौम का जायज़ा

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम के संपादकीय में अमरीका के साथ अगली किसी वार्ता में ईरान की पोज़ीशन का जायज़ा लिया गया है जो रोचक है।

अमरीका के नये राष्ट्रपति जो बाइडन के सामने सब से बड़ी चुनौती,  रूस, चीन और ईरान का त्रिपक्षीय गठबंधन है और अगर वह नये परमाणु समझौते के लिए नयी वार्ता की कोशिश करेंगे तो उन्हें एक अलग ईरान नज़र आएगा।

    यह जो चार बरसों तक अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प वाइट हाउस में रहे उस दौरान ईरानी राजनेता हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रहे बल्कि वह प्रतिबंधों के बावजूद इलाक़े में ईरान के प्रभाव को बढ़ाने और देश के भीतर स्थिरता बाकी रखने में सफल रहे। इसी तरह वह इस दौरान देश में होने वाले बहुत से प्रदर्शनों पर भी काबू पाने में कामयाब हुए जिन्हे अमरीका और युरोप का भरपूर समर्थन प्राप्त था और उनका मकसद ईरान की व्यवस्था को बदलना था।

    यह तीन देशों का नया गठबंधन, रूस, चीन और ईरान पर ट्रम्प की ओर से प्रतिबंध लगाने और बढ़ाने से, अधिक मज़बूत हुआ विशेषकर ईरान को उससे काफी फायदा पहुंचा जबकि परशियन गल्फ में अमरीका के घटक, तेल से होने वाली आमदनी से अमरीकी हथियार खरीदते रहे लेकिन यह हथियार उनकी सुरक्षा नहीं कर पाए।

    दिसंबर 2019 और सितंबर 2020 में होने वाले दो सैन्य अभ्यासों ने रूस, चीन और ईरान के गठबंधन को अधिक मज़बूत किया।

 

    रूस, चीन और ईरान के इस गठबंधन तथा उसके साथ भारत और अन्य एशियाई व अफ्रीकी देशों की ओर से वर्तमान अमरीकी विश्व व्यस्था के मलबे पर एक नयी विश्व व्यवस्था बनाने और डालर की पोज़ीशन को खत्म करने की कोशिश शायद अमरीका और उसके घटकों के लिए सब से बड़ा खतरा है और इसी लिए अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ माइक डेविडकोफ ने रूस के एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा है कि दस बरस के भीतर अमरीका का बिखराव शुरु हो जाएगा। उन्होंने इसके लिए उन्होंने टेक्ज़ास में रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष के हालिया बयान और फेडरल सरकार से हट कर केलीफोर्निया, एरीगन तथा अन्य पश्चिमी राज्यों के मध्य कोरोना से संघर्ष के लिए किये जाने वाले गठजोड़ का उदाहरण दिया।

    अमरीका के हालिया राष्ट्रपति चुनाव ने अमरीका में विभाजन को पूरी तरह से स्पषट कर दिया। आधे अमरीकियों का मानना है कि चुनाव परिणाम सही हैं जबकि आधे का यह सोचना है कि चुनाव में धांधली हुई है। इस लिए अपने देश में एकजुटता के लिए बाइडन का अभियान काफी कठिन है।

    परमाणु समझौते के बारे में अगली किसी भी वार्ता में ईरान कमज़ोर नहीं रहेगा जैसा कि रूस के बहुत से विशेषज्ञों का मानना है। ईरान ने अपनी मिसाइल शक्ति बहुत अधिक बढ़ा ली है इसके साथ ही अमरीका की खुफिया एजेन्सियों ने भी बताया है और फारेन अफेयर्स पत्रिका ने अपनी एक रिपोर्ट में उसका उल्लेख भी किया है कि ईरान  मास्को के साथ सुखोई-30 युद्धक विमान , टी-90 टैंक और एस-400 एन्टी मिसाइल व्यवस्था खरीदने के लिए वार्ता कर रहा है क्योंकि उस पर लगा हथियारों का प्रतिबंध हट चुका है और उसकी अवधिक बढ़ाने में ट्रम्प बुरी तरह से नाकाम हो चुके हैं।

    चीन ईरान की आर्थिक व सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए तेल व गैस, पेट्रोकेमिकल, बंदरगाहों , राजमार्गों और हुरमुज़ स्ट्रेट से हट कर हिंद महासागर तक पाइप लाइन बिछाने के लिए 400 अरब डालर का निवेश कर रहा है।

    इन सब परिवर्तनों में अरब कहां हैं? वह इस्राईल के साथ संबंध मधुर करने में लगे हैं, अधिकांश अरब देश, इस्राईल की मदद हासिल करने के प्रयास में हैं वह हथियार खरीद रहे हैं जो यमन के मिसाइलों को सऊदी अरब की आरामको तेल कंपनी और जो जद्दा बंदरगाह पर खड़े तेल वाहक जहाज़ों तक पहुंचने से भी रोकने की क्षमता नहीं रखते, बक़ीक और खरीस की बात ही क्या?